Wednesday, 26 December 2018

एक गीत जीवन गणित मानवी भूगोल में भी बस गणित का खेल है। पाव भर का कर्ज लेकिन सूद क्विंटल पर चढ़े, शून्य के पीछे पड़े सब शून्य जीवन पर मढ़े। हल करें या छोड़ दें हर दिन सवालों से घिरा, अंक धन ऋण भाग रेखा औ गुणन का मेल है। प्रश्न कुछ होते जटिल पर सूत्र केवल धैर्यता, ग्राफ अंको से करे तय जग किसी की योग्यता। सम विषम दोनों बराबर संधि केवल धन करे। कुछ खड़े लेकर दशमलव कुछ कटे तो फेल है। मान लो को मान लें तो क्या मजा क्या ठाट है, एक पाई पर रखें जब सौ किलो की बाट है। पल मिनट घंटा पहर दिन आयु के विस्तार में, कोण त्रिज्या सम चतुर्भुज खींच देता स्केल है। आशा देशमुख

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