गीत
उपवास
सह सको उतना करो मन व्रत नियम तप साधना ।
जो प्रमाणिक सार सच है
रीत या विज्ञान हो,
तर्क अनुसंधान होता
ज्ञान का सम्मान हो ,
साक्ष्य भी मौखिक लिखित हो छोड़ कोरी कल्पना ।
मीन से मेढक कहे गर
व्रत करोगी निर्जला,
सात जन्मों तक तुम्हारे
वंश का होगा भला ,
व्यर्थ के उपदेश की खुलकर करो तुम भर्त्सना ।
कर्म में भी चेतना हो
मन जतन ऐसा करो ,
श्रम समय उतना लगे
विध्वंस या गढ्ढा भरो,
सर्व हित शुभ कर्म की हर हस्त से हो स्थापना ।
आशा देशमुख
No comments:
Post a Comment